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लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गान प्रेम का गाता चल/ उषा को सत्य बनाने को जावक नभ पर छितराता चल//
रंगों के सातों घट ऊँडेल, यह अँधियारी रँग जायेगी/ जलदों से लदा गगन होगा, फलों से भरा भुवन होगा//
बेजान, यन्त्र-विरचित गूँगी, मूरतियाँ एक दिन बोलेंगी/ मुँह खोल-खोल सब के भीतर, शिल्पी! तू जीभ बिठाता चल//

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’

वाक फ़ॉर बिहार २०१६: उद्देश्य

चूँकि यह वॉक फ़ॉर बिहार का पहला अध्याय है, हमारा प्रथम लक्ष्य है सार्वजनिक कला आन्दोलन को पटना और बिहार तक लानाl बिहार में विकास, सामाजिक न्याय और मानव अधिकार के हमारे इस साल के विषय को विलक्षण, प्रगतिशील स्ट्रीट आर्ट एवम विडियो इंस्टालेशंस की मदद से प्रदर्शित किया जायेगाl

कला विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए हमेशा पसंदीदा माध्यम रहा है, क्योंकि इसमें वर्ग, समुदाय, और राजनीति से ऊपर उठकर बदलाव लाने की क्षमता हैl सार्वजनिक कला, यानि पब्लिक आर्ट, जो कि दुनिया के कई महानगरों में पहले ही लोकप्रिय है और अब बड़े शहरों में भी तेज़ी से अपनी पहचान बना रहा है, इस प्रकार के जागरूकता अभियान के लिए बहुत ही उपयुक्त हैl इस वर्ष होने वाला यह कला उत्सव पटना और बिहार को स्वतः ही विश्व कला मंच पर अंकित कर देगाl


वॉक फ़ॉर बिहार २०१६: लक्ष्य

निम्नलिखित कार्य-कलाप नियोजित किए गए हैं - 

विशाल सार्वजनिक कलाकृतियाँ (स्ट्रीट आर्ट): इस कला उत्सव की विशिष्टता होंगी पटना की स्थानीय इमारतों पर बनी देश-विदेश के प्रसिद्ध कलाकारों की विशाल कलाकृतियाँl यह विशालकाय, परन्तु सुलभ कलाकृतियाँ इस उत्सव के विभिन्न विषयों को चित्रित करेंगीl

मूर्तिकला स्थापन

वीडियो इंस्टालेशंस: आम जनता से १-१० मिनट तक के ऐसे ऑडियो-विडियो आमंत्रित किए जायेंगे जो इस उत्सव के विषयों पर आधारित होंl

मीडिया कार्यक्रम: मीडिया के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा जहाँ आयोजक, कलाकार, आमंत्रित वक्ता और चुनिंदा श्रोता एक दुसरे से बात-चीत कर सकेंगेl


आइए, बिहार के लिए क़दम बढ़ाएं – लेट’स वॉक फ़ॉर बिहार!

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वॉक फ़ॉर बिहार एक पहल है जो कलात्मक क्रियाकलापों के माध्यम से बिहार के आर्थिक व सांस्कृतिक विकास में सार्वजनिक सहभागिता और सहयोग को आमंत्रित करता हैl

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